लगता है कई रातों का जागा था मुसव्विर तस्वीर की आँखों से थकन झाँक रही है

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Unknown
@unknown
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Sher
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Ghazal
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Nazm
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sherKuch Alfaaz
sherKuch Alfaaz
टकरा गया वो मुझ से किताबें लिए हुए फिर मेरा दिल और उस की किताबें बिखर गईं
sherKuch Alfaaz
कई जवाबों से अच्छी है ख़ामुशी मेरी न जाने कितने सवालों की आबरू रक्खे
sherKuch Alfaaz
ये साल भी उदासियाँ दे कर चला गया तुम से मिले बग़ैर दिसम्बर चला गया
sherKuch Alfaaz
इन का उठना नहीं है हश्र से कम घर की दीवार बाप का साया
sherKuch Alfaaz
न हों अश'आर में माअनी न सही ख़ुद कलामी का ज़रिया ही सही
sherKuch Alfaaz
ईद के बा'द वो मिलने के लिए आए हैं ईद का चाँद नज़र आने लगा ईद के बा'द
sherKuch Alfaaz
दुनिया में वही शख़्स है ताज़ीम के क़ाबिल जिस शख़्स ने हालात का रुख़ मोड़ दिया हो
sherKuch Alfaaz
क्या क़यामत है कि आरिज़ उन के नीले पड़ गए हम ने तो बोसा लिया था ख़्वाब में तस्वीर का
sherKuch Alfaaz
चल दिए घर से तो घर नहीं देखा करते जाने वाले कभी मुड़ कर नहीं देखा करते
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