दिल पे आए हुए इल्ज़ाम से पहचानते हैं लोग अब मुझ को तिरे नाम से पहचानते हैं
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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अपने होंटों पर सजाना चाहता हूँ आ तुझे मैं गुनगुनाना चाहता हूँ
Qateel Shifai
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सुन लिया कैसे ख़ुदा जाने ज़माने भर ने वो फ़साना जो कभी हम ने सुनाया भी नहीं
Qateel Shifai
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वो मेहरबाँ है तो इक़रार क्यूँँ नहीं करता वो बद-गुमाँ है तो सौ बार आज़माए मुझे
Qateel Shifai
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दूर तक छाए थे बादल और कहीं साया न था इस तरह बरसात का मौसम कभी आया न था
Qateel Shifai
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सितम तो ये है कि वो भी न बन सका अपना क़ुबूल हम ने किए जिस के ग़म ख़ुशी की तरह कभी न सोचा था हम ने 'क़तील' उस के लिए करेगा हम पे सितम वो भी हर किसी की तरह
Qateel Shifai
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