गर्मी दिल्ली की सह नहीं पाते बात करते हैं साथ रहने की
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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ये रब्त कब मिटे है यूँँ मिटाने से ये आग है जो बढ़ती है बुझाने से
Rohan Hamirpuriya
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सुनते हैं रात होती है सोने के लिए हम को तो रास आई है रोने के लिए
Rohan Hamirpuriya
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थोड़ा सा जो मैं शातिर हूँ सिर्फ़ तुम्हारी ख़ातिर हूँ
Rohan Hamirpuriya
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याद नहीं आती है उस को मेरी अब मगर देखे हैं पत्थर के दिल मैं ने पिघलते हुए
Rohan Hamirpuriya
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पामाल रस्तों पर मिले रहबर उसे कई संगीन जब सफ़र हुआ उस ने चुना मुझे
Rohan Hamirpuriya
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