हमारी ज़िंदगी का फ़लसफ़ा क्या फ़क़त इक है से था तक का सफ़र है
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ज़मीं पे घर बनाया है मगर जन्नत में रहते हैं हमारी ख़ुश-नसीबी है कि हम भारत में रहते हैं
Mehshar Afridi
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तू जो हर रोज़ नए हुस्न पे मर जाता है तू बताएगा मुझे इश्क़ है क्या जाने दे
Ali Zaryoun
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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सफ़र में आख़िरी पत्थर के बा'द आएगा मज़ा तो यार दिसंबर के बा'द आएगा
Rahat Indori
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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नहीं मिलते हैं मेरे लोग वैसे मिले सूरज-मुखी जैसे किरन से
Shivam chaubey
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जैसे कि फूल शाख के और चाँद ईद के हम भी तो साथ-साथ हैं पर उस तरह नहीं
Shivam chaubey
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उस की लुगत में सब्र का मतलब क्या होगा मेरी लुगत में सब्र का मतलब धोखा है
Shivam chaubey
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उस के हिज्र का इक लम्हा जो मैं ने बरसों बरस जिया उस ने तो बस तागा खींचा मैं ने खूब उधेड़ा दुख
Shivam chaubey
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हमारे साथ भी रह कर नहीं पिघल पाया नदी की क़ुर्ब में पत्थर नहीं हुआ पानी
Shivam chaubey
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