हथेली बंद कर के दूर तक पैदल चलो ना यार अपना घर दिखाता हूँ
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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हम को यारों ने याद भी न रखा 'जौन' यारों के यार थे हम तो
Jaun Elia
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तेरी ख़ुशियों का सबब यार कोई और है ना दोस्ती मुझ सेे है और प्यार कोई और है ना
Ali Zaryoun
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
Tehzeeb Hafi
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मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्किय्यत का दावा नइँ वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ
Ali Zaryoun
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वो मुझ से दूर जाने को मुसलसल दर बदलता है कभी घर का पता अपना कभी नंबर बदलता है
Aashish kargeti 'Kash'
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वो किस जगह पे छोड़ जाए क्या ख़बर इस बात से बस वो ही रहता बा-ख़बर हम ने तबह कर ली है अपनी ज़िंदगी उस की गली में जा के फैलाना ख़बर
Aashish kargeti 'Kash'
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उस पे इतना यक़ीं किया मैं ने आसमाँ को ज़मीं किया मैं ने
Aashish kargeti 'Kash'
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ख़ुश रहा करते थे तुम हमारे बग़ैर ज़िंदगी काट ली लो तुम्हारे बग़ैर
Aashish kargeti 'Kash'
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याद में रख लिया तवाईफ़ को रात में फिर से सो गया जल्दी
Aashish kargeti 'Kash'
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