हम इन आँखों से उसे हर रोज़ पढ़ते आए हैं वो बदन तो याद है दो के पहाड़े की तरह
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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हर घड़ी कर रही नज़दीक बिछड़ने के मुझे घड़ी मुझ सेे तेरा चलना नहीं देखा जाता
Ankit Maurya
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वो ग़ुस्से में सीधी बात नहीं करता तूफ़ानों में बारिश तिरछी होती है
Ankit Maurya
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खोने नहीं दूँगा किसी भी शर्त पे इनको बस दोस्त ही हैं मर्द के ज़ेवर उसे कहना
Ankit Maurya
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अच्छा था जो भी फ़िल्म में यूँ ही गुज़र गया वो सीन जो ख़राब था आँखों में रह गया
Ankit Maurya
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बताया है किसी के इश्क़ ने हम को कि दुनिया ख़ूब-सूरत भी हो सकती है
Ankit Maurya
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