हम पे एहसान हैं उदासी के मुस्कुराएँ तो शर्म आती है
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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तेरे लगाए हुए ज़ख़्म क्यूँँ नहीं भरते मेरे लगाए हुए पेड़ सूख जाते हैं
Tehzeeb Hafi
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तेरे कहने से ये जादू नहीं होने वाला अब सितारा कोई जुगनू नहीं होने वाला फिर भी बेताब हूँ कितना मैं तेरा होने को जानता हूँ कि मेरा तू नहीं होने वाला
Varun Anand
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न जाने कौन सी आए सदा पसंद उसे सो हम सदाएँ बदल कर सदाएँ देते रहे
Varun Anand
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ये कितनी लाशें सहेजे किसे कहाँ रक्खें कि तंग आ गई है अब ज़मीन लोगों से
Varun Anand
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लोगों को उस का नाम बताने से रह गया इक लफ़्ज़ था जो शे'र में आने से रह गया इस बार भी उसी की सुनी उस की मान ली इस बार भी मैं अपनी सुनाने से रह गया
Varun Anand
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बड़ी जल्दी में था उस दिन ज़रा बेचैन भी था वो उसे कहना था कुछ मुझ सेे मगर वो कह नहीं पाया
Varun Anand
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