ishq ki chot ka kuchh dil pe asar ho to sahi dard kam ho ya ziyaada ho magar ho to sahi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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जिस ने कुछ एहसाँ किया इक बोझ सर पर रख दिया सर से तिनका क्या उतारा सर पे छप्पर रख दिया
Jalal Lakhnavi
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मैं ने पूछा कि है क्या शग़्ल तो हँसकर बोले आज कल हम तेरे मरने की दुआ करते हैं
Jalal Lakhnavi
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न हो बरहम जो बोसा बे-इजाज़त ले लिया मैं ने चलो जाने दो बे-ताबी में ऐसा हो ही जाता है
Jalal Lakhnavi
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