जिस सेे बाँटी जाएगी इश्क़-ओ-मोहब्बत की ज़िया नफ़रतों के शहर में वो घर बनाया जाएगा
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बात ही कब किसी की मानी है अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी ये कलाई ये जिस्म और ये कमर तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी
Jaun Elia
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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कुछ न कुछ बोलते रहो हम सेे चुप रहोगे तो लोग सुन लेंगे
Fahmi Badayuni
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दूरी हुई तो उन सेे क़रीब और हम हुए ये कैसे फ़ासले थे जो बढ़ने से कम हुए
Waseem Barelvi
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ये जो मैं होश में रहता नहीं तुम सेे मिल कर ये मिरा इश्क़ है तुम इस को नशा मत समझो
Shakeel Azmi
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जिस सेे डरते थे ज़माने के सितमगर सारे आज के दौर का वो मालिक-ए-अश्तर न रहा
''Akbar Rizvi"
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नुसरत-ए-हक़ देखना आशूर तक ले जाएगी हसरत-ए-दीदार कोह-ए-तूर तक ले जाएगी
''Akbar Rizvi"
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जिस को रहती है हर घड़ी तेरी फ़िक्र ऐसे आशिक़ से दिल-लगी करना
''Akbar Rizvi"
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ज़मीर बेच के ये भी अमीर हो जाते अगर ग़रीबों में ख़ुद्दारियाँ नहीं होती
''Akbar Rizvi"
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कोई उठता नहीं मज़लूम का हामी बनकर कब तलक ज़ुल्म पा ख़ामोश रहेगी दुनिया
''Akbar Rizvi"
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