जिस को रहती है हर घड़ी तेरी फ़िक्र ऐसे आशिक़ से दिल-लगी करना
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गले मिलना न मिलना तो तेरी मर्ज़ी है लेकिन तेरे चेहरे से लगता है तेरा दिल कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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वो मुझ को छोड़ के जिस आदमी के पास गया बराबरी का भी होता तो सब्र आ जाता
Parveen Shakir
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ये प्यार तेरी भूल है क़ुबूल है मैं संग हूँ तू फूल है क़ुबूल है तू रूठेगी तो मैं मनाऊँगा नहीं जो रूल है वो रूल है क़ुबूल है
Varun Anand
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जिस सेे डरते थे ज़माने के सितमगर सारे आज के दौर का वो मालिक-ए-अश्तर न रहा
''Akbar Rizvi"
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बस ऐसे इलाके को नज़र ढूॅंढ रही है दरिया जहाँ मिलता है समुंदर नहीं मिलता
''Akbar Rizvi"
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मुझ को ख़बर हुई न लहद आ गई क़रीब किस तर हाँ बढ़ रही है ये रफ़्तारें ज़िंदगी
''Akbar Rizvi"
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बा'द में बिखरे अगर और भी होगा अफ़सोस मैं न बच्चों को नए ख़्वाब सजाने दूँगा
''Akbar Rizvi"
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ज़मीर बेच के ये भी अमीर हो जाते अगर ग़रीबों में ख़ुद्दारियाँ नहीं होती
''Akbar Rizvi"
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