काम ही आग लगाना हो यहाँ पर जिन का कैसे समझेंगे भला आग बुझाने का दुख
Related Sher
दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
267 likes
तू शाहीं है परवाज़ है काम तेरा तेरे सामने आसमाँ और भी हैं
Allama Iqbal
64 likes
घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
294 likes
कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
163 likes
तुम ने भी उन से ही मिलना होता है जिन लोगों से मेरा झगड़ा होता है तुम मेरी दुनिया में बिल्कुल ऐसे हो ताश में जैसे हुकुम का इक्का होता है
Zia Mazkoor
68 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Naveen "Bashaarat".
Similar Moods
More moods that pair well with Naveen "Bashaarat"'s sher.







