kab dhup chali sham dhali kis ko khabar hai ek umr se main apne hi sae mein khada hun
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
Bashir Badr
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
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तुम ने छोड़ा तो किसी और से टकराऊँगा मैं कैसे मुमकिन है कि अंधे का कहीं सर न लगे
Umair Najmi
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'अख़्तर' गुज़रते लम्हों की आहट पे यूँँ न चौंक इस मातमी जुलूस में इक ज़िंदगी भी है
Akhtar Hoshiyarpuri
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क्या लोग हैं कि दिल की गिरह खोलते नहीं आँखों से देखते हैं मगर बोलते नहीं
Akhtar Hoshiyarpuri
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क्या लोग हैं कि दिल की गिरह खोलते नहीं आँखों से देखते हैं मगर बोलते नहीं
Akhtar Hoshiyarpuri
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