कैसा बचपन था, कैसी थी दादीजी भी बातें बचपन की सब कुछ बताती है वो
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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क्या ग़लत-फ़हमी में रह जाने का सदमा कुछ नहीं वो मुझे समझा तो सकता था कि ऐसा कुछ नहीं इश्क़ से बच कर भी बंदा कुछ नहीं होता मगर ये भी सच है इश्क़ में बंदे का बचता कुछ नहीं
Tehzeeb Hafi
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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उस को भुला कर मुझ को ये मालूम हुआ आदत कैसी भी हो छोड़ी जा सकती है
Nadeem Shaad
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वो नादाँ भी हैं बे-दाग़ भी हैं वो लीडर होना कोई सीख रहा है
FARHAN ASHRAF
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मैं रहता अब उस के ध्यान में कैसे उस के तो हैं लाखों चाहने वाले
FARHAN ASHRAF
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आदतन मैं तो ख़ामोश हो जाता हूँ अपनी जब भी कहानी सुनाती है वो
FARHAN ASHRAF
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मेरे दोस्त कम है जो भी हैं अहम हैं ग़म हो या ख़ुशी हो सब में हम बहम है
FARHAN ASHRAF
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याद रखना आप को जैसे मुस्कुराना और मर जाना
FARHAN ASHRAF
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