kuchh allahabad mein saman nahin bahbud ke yan dhara kya hai ba-juz akbar ke aur amrud ke
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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क़ौम के ग़म में डिनर खाते हैं हुक्काम के साथ रंज लीडर को बहुत है मगर आराम के साथ
Akbar Allahabadi
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दिल वो है कि फ़रियाद से लबरेज़ है हर वक़्त हम वो हैं कि कुछ मुँह से निकलने नहीं देते
Akbar Allahabadi
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दावा बहुत बड़ा है रियाज़ी में आप को तूल-ए-शब-ए-फ़िराक़ को तो नाप दीजिए
Akbar Allahabadi
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बी.ए भी पास हों मिले बी-बी भी दिल-पसंद मेहनत की है वो बात ये क़िस्मत की बात है
Akbar Allahabadi
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जो वक़्त-ए-ख़त्ना मैं चीख़ा तो नाई ने कहा हँस कर मुसलमानी में ताक़त ख़ून ही बहने से आती है
Akbar Allahabadi
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