क्या ताब क्या मजाल हमारी कि बोसा लें लब को तुम्हारे लब से मिला कर कहे बग़ैर
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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हम को नीचे उतार लेंगे लोग इश्क़ लटका रहेगा पंखे से
Zia Mazkoor
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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दिल मेरा बैठा है ले कर फिर मुझी से वो निगार पूछता है हाथ में मेरे बता क्या चीज़ है
Bahadur Shah Zafar
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न थी हाल की जब हमें अपने ख़बर रहे देखते औरों के ऐब-ओ-हुनर पड़ी अपनी बुराइयों पर जो नज़र तो निगाह में कोई बुरा न रहा
Bahadur Shah Zafar
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बे-ख़ुदी में ले लिया बोसा ख़ता कीजे मुआ'फ़ ये दिल-ए-बेताब की सारी ख़ता थी मैं न था
Bahadur Shah Zafar
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मेहनत से है अज़्मत कि ज़माने में नगीं को बे-काविश-ए-सीना न कभी नामवरी दी
Bahadur Shah Zafar
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तुम ने किया न याद कभी भूल कर हमें हम ने तुम्हारी याद में सब कुछ भुला दिया
Bahadur Shah Zafar
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