मेरी क़िस्मत में बरबादियाँ थीं अज़ल से ही लिक्खी हुईं तुझ से जस्सर करूँँ क्या गिला तू फ़क़त इक बहाना हुआ
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तुझ से दूर हुआ तो ये मालूम हुआ ख़ुद से कितना दूर निकल आया था मैं
Avtar Singh Jasser
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ज़रा नज़दीक आ कर सुन मेरी इक बात ऐ उर्दू मेरी तहरीर बिन तेरे मुक़म्मल हो नहीं सकती
Avtar Singh Jasser
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ये दुनिया इस लिए ही मुझ को पागल कह रही है मेरी कश्ती जो तूफ़ाँ के मुक़ाबिल बह रही है
Avtar Singh Jasser
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मैं ने जस्सर उस को भी तो छोड़ दिया जिस की ख़ातिर सारी दुनिया छोड़ी थी
Avtar Singh Jasser
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उर्दू ज़बाँ से चाहतों का ये असर हुआ 'जस्सर' सुख़न मेरा हलावतों से तर हुआ
Avtar Singh Jasser
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