mujhe tauba ka pura ajr milta hai usi saat koi zohra-jabin pine pe jab majbur karta hai
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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फिर आज 'अदम' शाम से ग़मगीं है तबीअत फिर आज सर-ए-शाम मैं कुछ सोच रहा हूँ
Abdul Hamid Adam
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बढ़ के तूफ़ान को आग़ोश में ले ले अपनी डूबने वाले तिरे हाथ से साहिल तो गया
Abdul Hamid Adam
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दिल अभी पूरी तरह टूटा नहीं दोस्तों की मेहरबानी चाहिए
Abdul Hamid Adam
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ऐ ग़म-ए-ज़िंदगी न हो नाराज़ मुझ को आदत है मुस्कुराने की
Abdul Hamid Adam
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हद से बढ़ कर हसीन लगते हो झूटी क़स में ज़रूर खाया करो
Abdul Hamid Adam
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