न बन अनजान इतना आज जल्दी आसमाँ में आ कि थोड़ा तो तरस कर चाँद मेरा चाँद भूखा है
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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ज़माना ख़ुद को बदले या न बदले ये उसी पर है कही पर तुम किसी की यूँँ न अपने आप को बदलो
Sarvjeet Singh
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ये जो इतने ख़ुश दिखते हैं सच में ये इतने ख़ुश हैं क्या
Sarvjeet Singh
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ज़िन्दगी आसान है पर लोग हैं मुश्किल बहुत ही
Sarvjeet Singh
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तुझे क्या बद-दुआ दूँ मैं मुझे तड़पाने वाली अब ख़ुदा से माँगता हूँ ये कि तेरा भी भला ही हो
Sarvjeet Singh
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सच्ची किसी के पास या झूटी किसी के पास में कोई ख़बर उस की न अब मिलती किसी के पास में हैं ताश के पत्तों के जैसे हो गए दो दिल जुदा राजा किसी के पास में रानी किसी के पास में
Sarvjeet Singh
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