नदी के शांत तट पर बैठ जाऊँ और वो रावी की तरह बहती चली जाए पता है आज तुम को क्या हुआ 'आदिव' वो बोले और फिर कहती चली जाए
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मैं किसी तरह भी समझौता नहीं कर सकता या तो सब कुछ ही मुझे चाहिए या कुछ भी नहीं
Jawwad Sheikh
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इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है
Dushyant Kumar
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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ज़िंदगी किस तरह बसर होगी दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में
Jaun Elia
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ये धुआँ सिगरेट का बिखरी किताबें बंद पर्दे दिख रहा है जैसा मेरा कमरा तो ऐसा नहीं था
Abhay Aadiv
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टूट कर बिखरने नईं दिया उस ने मुझे जोड़कर कुछ ऐसे ही रखा उस ने मुझे
Abhay Aadiv
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यार वक़्त ख़ुद का लाने में वक़्त लगता है बीज को शजर बन जाने में वक़्त लगता है
Abhay Aadiv
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ज़िम्मेदारी जीने ही देती नहीं है ज़िंदगी भर जीनी पड़ती हैं बहुत सी ज़िंदगी इक ज़िंदगी में
Abhay Aadiv
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पास होकर भी मेरे नहीं जो क़रीब ऐसी कु़र्बत से अच्छी जुदाई मुझे
Abhay Aadiv
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