निभाने में कसर बाक़ी न छोड़ी याद तो होगा मोहब्बत के जुनूँ में जो ख़म-ए-गेसू सँवारे थे
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ये हँसने गाने वाले लोग तस्वीरों में रह जाऍंगे
Rohan Hamirpuriya
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सब बाहों में झूल चुकी है वो तुझ को कब का भूल चुकी है वो
Rohan Hamirpuriya
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तुझ सेे जुदा है मेरा तौर-ए-ज़िन्दगी उम्मीद पे हरगिज़ नहीं ज़िंदा रखा
Rohan Hamirpuriya
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ये रब्त कब मिटे है यूँँ मिटाने से ये आग है जो बढ़ती है बुझाने से
Rohan Hamirpuriya
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थोड़ा सा जो मैं शातिर हूँ सिर्फ़ तुम्हारी ख़ातिर हूँ
Rohan Hamirpuriya
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