पानी से पत्थर को कटते देखा है हम ने उस को रोज़ संवरते देखा है
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हम ने उस को इतना देखा जितना देखा जा सकता था लेकिन फिर भी दो आँखों से कितना देखा जा सकता था
Farrukh Yar
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आँखों को मूँद लेने से ख़तरा न जाएगा वो देखना पड़ेगा जो देखा न जाएगा
Waseem Barelvi
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कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो
Dushyant Kumar
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कबूतर इश्क़ का उतरे तो कैसे? तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है इरादा कर लिया गर ख़ुद-कुशी का तो ख़ुद की आँख का पानी बहुत है
Kumar Vishwas
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उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया देखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया
Meer Taqi Meer
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ये नदियाँ दूर तक जाए किनारे कम नहीं होते भला किस के दिलो में तुम कहो की ग़म नहीं होते यूँँ ही हर बात पर रुशवा अगर होने लगोगे तो कहो कैसे संभाले दिल भला क्यूँ हम नहीं रोते
Aryan Goswami
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मैं तुझ सेे रोज़ छुआ जाऊँ यही चाहत थी, है, रहेगी
Aryan Goswami
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ग़ज़ल है आत्मा फिर भी नज़ाकत की ज़रूरत है बूढ़ापो के मोहल्ले में शरारत की ज़रूरत है ये दुनिया जान कर भी कुछ नहीं करती मेरे ख़ातिर मुझे उस की ज़रूरत है उसे मेरी ज़रूरत है
Aryan Goswami
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ये शा'इरी ये शाइ'र इस ग़ज़ल को प्रणाम अदब सीखने वाली हर क़लम को प्रणाम
Aryan Goswami
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ए ज़िंदगी तेरी फ़रमाहिशे किसी दिन जान ले के छोड़ेगी
Aryan Goswami
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