मैं तुझ सेे रोज़ छुआ जाऊँ यही चाहत थी, है, रहेगी
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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वो मुझे कितना याद करती है ये मेरी हिचकियाँ बताती है
Aryan Goswami
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तू मेरी जुस्त जू से वाक़िफ़ है ये मेरे लिए बहुत मुनासिफ है
Aryan Goswami
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मुझ सेे बिछड़ कर कहाँ लग रहा है बताओ ज़रा ये जहाँ लग रहा है उन्हीं से ख़ुश रहने की,की थी गुज़ारिश वो ख़ुश है तो देखो बुरा लग रहा है
Aryan Goswami
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ग़ज़ल है आत्मा फिर भी नज़ाकत की ज़रूरत है बूढ़ापो के मोहल्ले में शरारत की ज़रूरत है ये दुनिया जान कर भी कुछ नहीं करती मेरे ख़ातिर मुझे उस की ज़रूरत है उसे मेरी ज़रूरत है
Aryan Goswami
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किसी की बाँह भी ख़ाली नहीं की रो सकूँ जिस में तुम्हारे जिस्म से ये मन बहुत उक्ता गया सा है
Aryan Goswami
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