parind kyun meri shakhon se khauf khate hain ki ek darakht hun aur saya-dar main bhi hun
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
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सब परिंदों से प्यार लूँगा मैं पेड़ का रूप धार लूँगा मैं तू निशाने पे आ भी जाए अगर कौन सा तीर मार लूँगा मैं
Tehzeeb Hafi
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बिन तुम्हारे कभी नहीं आई क्या मिरी नींद भी तुम्हारी है
Jaun Elia
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सफ़र से लौट जाना चाहता है परिंदा आशियाना चाहता है कोई स्कूल की घंटी बजा दे ये बच्चा मुस्कुराना चाहता है
Shakeel Jamali
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प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है नए परिंदों को उड़ने में वक़्त तो लगता है
Hastimal Hasti
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ये ताएरों की क़तारें किधर को जाती हैं न कोई दाम बिछा है कहीं न दाना है
Asad Badayuni
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परिंद पेड़ से परवाज़ करते जाते हैं कि बस्तियों का मुक़द्दर बदलता जाता है
Asad Badayuni
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देखने के लिए सारा आलम भी कम चाहने के लिए एक चेहरा बहुत
Asad Badayuni
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परिंद क्यूँँ मिरी शाख़ों से ख़ौफ़ खाते हैं कि इक दरख़्त हूँ और साया-दार मैं भी हूँ
Asad Badayuni
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