पत्थर के ख़ुदा पत्थर के सनम पत्थर के ही इंसाँ पाए हैं तुम शहर-ए-मोहब्बत कहते हो हम जान बचा कर आए हैं
Related Sher
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
तुम्हारे पाँव क़सम से बहुत ही प्यारे हैं ख़ुदा करे मेरे बच्चों की इन में जन्नत हो
Rafi Raza
107 likes
और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
Faiz Ahmad Faiz
106 likes
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
484 likes
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
471 likes
More from Sudarshan Fakir
आप कहते थे कि रोने से न बदलेंगे नसीब उम्र भर आप की इस बात ने रोने न दिया
Sudarshan Fakir
35 likes
फिर न आया ख़याल जन्नत का जब तेरे घर का रास्ता देखा
Sudarshan Fakir
0 likes
ज़िक्र जब होगा मोहब्बत में तबाही का कहीं याद हम आएँगे दुनिया को हवालों की तरह
Sudarshan Fakir
39 likes
तेरे जाने में और आने में हम ने सदियों का फ़ासला देखा
Sudarshan Fakir
30 likes
इश्क़ है इश्क़ ये मज़ाक़ नहीं चंद लम्हों में फ़ैसला न करो
Sudarshan Fakir
43 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Sudarshan Fakir.
Similar Moods
More moods that pair well with Sudarshan Fakir's sher.







