पुराने घर के मलबे पर नई कुर्सी बना कर जो मकाँ हम ने बिठाया है मज़ार-ए-दौर-ए-बचपन है
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एक तस्वीर बनाऊँगा तेरी और फिर हाथ लगाऊँगा तुझे
Nasir khan 'Nasir'
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"उस के हाथ में फूल है" मत कहिए, कहिए उस का हाथ है फूल को फूल बनाने में
Charagh Sharma
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अपने दिल में बसाओगे हम को और गले से लगाओगे हम को हम नहीं इतने प्यार के क़ाबिल तुम तो पागल बनाओगे हम को
Abrar Kashif
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शायद क़ज़ा ने मुझ को ख़ज़ाना बना दिया ऐसा नहीं तो क्यूँँ मुझे दफ़ना रहे हैं लोग
Zubair Ali Tabish
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इत्तिफ़ाक़ अपनी जगह ख़ुश-क़िस्मती अपनी जगह ख़ुद बनाता है जहाँ में आदमी अपनी जगह
Anwar Shaoor
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ज़िक्र बादल का भी होना चाहिए सिर्फ़ सावन का यहाँ चर्चा हुआ
Javed Aslam
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वो रास्ते भी आज कई मंज़िला हुए मेरा जो रास्ता था ज़मीं पर नहीं रहा
Javed Aslam
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वो मुहब्बत के इवज़ जान भी दे देते हैं रस्म सदियों से यही आम है परवानों में
Javed Aslam
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उसी से प्यार है जिस से हमें नाराज़गी भी है जहाँ पर बैर होता है वहीं वाबस्तगी भी है
Javed Aslam
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याद वो लौटा गए लेकिन मिरा एक दिल भी था वहाँ खोया हुआ
Javed Aslam
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