रिवाज़ेँ, रस्म ए दुनिया देख कर सीखा है ये मैं ने लगे जब आग घर में अब किसी के तो हवा करिए
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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ये मान लिया मैं ने बदला हूँ बहुत लेकिन ये ठीक है क्या पहले जैसी ही रही हो तुम
Prashant Sitapuri
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वो कक्षा दस की यादें वो हिंदी का पहला पेपर वो लंबी पटरी वाली लड़की याद बहुत आती है मुझ सेे प्यार बहुत है तो अपने आप ही जाने वो क्यूँँ कह दूँ यारों मुझ को उस की याद बहुत आती है
Prashant Sitapuri
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याँ जब भी गुलाबों को मैं हाथ लगाता हूँ क्या जान मिरी वाँ तेरे होंठ लरज़ते हैं
Prashant Sitapuri
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तन्हाई में महफिल होता हूँ पर भीड़ अकेला कर देती है
Prashant Sitapuri
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पहला सितम शफ़ा की दवा एक शख़्स था दूजा सितम है ये कि दवा कुछ न कर सकी
Prashant Sitapuri
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