याँ जब भी गुलाबों को मैं हाथ लगाता हूँ क्या जान मिरी वाँ तेरे होंठ लरज़ते हैं
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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वो लड़ कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस से मोहब्बत एक तरफ़ है उस से झगड़ा एक तरफ़
Varun Anand
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गुलाब ख़्वाब दवा ज़हर जाम क्या क्या है मैं आ गया हूँ बता इंतिज़ाम क्या क्या है
Rahat Indori
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
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ये ग़म है तेरे ना होते हुए भी मुस्कुराना है हवा भी साथ रखनी है दियों को भी जलाना है
Prashant Sitapuri
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तुम्हें कुछ दे नहीं सकता मगर फिर भी फ़कीरी में निकलती है दुआ मुझ सेे
Prashant Sitapuri
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वो कक्षा दस की यादें वो हिंदी का पहला पेपर वो लंबी पटरी वाली लड़की याद बहुत आती है मुझ सेे प्यार बहुत है तो अपने आप ही जाने वो क्यूँँ कह दूँ यारों मुझ को उस की याद बहुत आती है
Prashant Sitapuri
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हर बात पे हँसना तो पागल की निशानी है हम लोग भी पागल हैं हर बात पे हँसते हैं
Prashant Sitapuri
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कौन जाने किस तरह से हादसा ये हो गया ख़ूब रोका दिल को फिर भी प्यार तुझ सेे हो गया
Prashant Sitapuri
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