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रोज़ रोएँगे दिल जलाएँगे एक दिन थक के बैठ जाएँगे कौन हम को गले लगाता है हम किसे दास्ताँ सुनाएँगे

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तेरा पीछा करते करते जाने क्यूँ मैं दुनियादारी से पीछे छूट गया तू ने तो ऐ जान महज़ दिल तोड़ा था तू क्या जाने मैं अंदर तक टूट गया

Ritesh Rajwada

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हर ख़ुशी मुस्कुरा के कहती है दर्द बनकर छुपे हुए हो तुम आज आब-ओ-हवा में ख़ुश्बू है लग रहा है घुले हुए हो तुम

Ritesh Rajwada

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ज़्यादा मीठा हो तो चींटा लग जाता है सच्चे इश्क़ को अक्सर बट्टा लग जाता है हम ने अपनी जान गंवाई तब जाना भाव मिले तो कुछ भी सट्टा लग जाता है

Ritesh Rajwada

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कहानी भी नहीं है दिल में कोई सो कुछ भी इन दिनों अच्छा नहीं है मैं अब उकता गया हूँ ज़िन्दगी से मेरा जी अब कहीं लगता नहीं है

Ritesh Rajwada

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जीत हूँ जश्न-ए-मुक़द्दर हूँ मैं ठीक से देख सिकंदर हूँ मैं

Ritesh Rajwada

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