रोज़ रोएँगे दिल जलाएँगे एक दिन थक के बैठ जाएँगे कौन हम को गले लगाता है हम किसे दास्ताँ सुनाएँगे
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे
Ali Zaryoun
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हम तो कुछ देर हँस भी लेते हैं दिल हमेशा उदास रहता है
Bashir Badr
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तुम पूछो और मैं न बताऊँ ऐसे तो हालात नहीं एक ज़रा सा दिल टूटा है और तो कोई बात नहीं
Qateel Shifai
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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तेरा पीछा करते करते जाने क्यूँ मैं दुनियादारी से पीछे छूट गया तू ने तो ऐ जान महज़ दिल तोड़ा था तू क्या जाने मैं अंदर तक टूट गया
Ritesh Rajwada
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हर ख़ुशी मुस्कुरा के कहती है दर्द बनकर छुपे हुए हो तुम आज आब-ओ-हवा में ख़ुश्बू है लग रहा है घुले हुए हो तुम
Ritesh Rajwada
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ज़्यादा मीठा हो तो चींटा लग जाता है सच्चे इश्क़ को अक्सर बट्टा लग जाता है हम ने अपनी जान गंवाई तब जाना भाव मिले तो कुछ भी सट्टा लग जाता है
Ritesh Rajwada
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कहानी भी नहीं है दिल में कोई सो कुछ भी इन दिनों अच्छा नहीं है मैं अब उकता गया हूँ ज़िन्दगी से मेरा जी अब कहीं लगता नहीं है
Ritesh Rajwada
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जीत हूँ जश्न-ए-मुक़द्दर हूँ मैं ठीक से देख सिकंदर हूँ मैं
Ritesh Rajwada
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