रोज़ ही मरने को कहते ज़िंदगी सिर्फ़ जीना ज़िंदगी है ही नहीं
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हम हैं ना! ये जो मुझ सेे कहते हैं ख़ुद किसी और के भरोसे हैं ज़िंदगी के लिए बताओ कुछ ख़ुद-कुशी के तो सौ तरीक़े हैं
Vikram Gaur Vairagi
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चल गया होगा पता ये आप को बे-वफ़ा कहते हैं लड़के आप को इक ज़रा से हुस्न पर इतनी अकड़ तू समझती क्या है अपने आप को
Kushal Dauneria
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दोस्ती लफ़्ज़ ही में दो है दो सिर्फ़ तेरी नहीं चलेगी दोस्त
Zubair Ali Tabish
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निगाहों के तक़ाज़े चैन से मरने नहीं देते यहाँ मंज़र ही ऐसे हैं कि दिल भरने नहीं देते हमीं उन से उमीदें आसमाँ छूने की करते हैं हमीं बच्चों को अपने फ़ैसले करने नहीं देते
Waseem Barelvi
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दिन में मिल लेते कहीं रात ज़रूरी थी क्या? बेनतीजा ये मुलाक़ात ज़रूरी थी क्या मुझ सेे कहते तो मैं आँखों में बुला लेता तुम्हें भीगने के लिए बरसात ज़रूरी थी क्या
Abrar Kashif
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वक़्त के ही साथ घट जाएँ तो अच्छा दरमियाँ दोनों के जितनी दूरियाँ हो तुम को अपना कह दिया सो सब है मंज़ूर जितनी भी अब यार तुझ में ख़ामियाँ हो
Aditya Maurya
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ज़िंदगी आसाँ नहीं सो इस लिए भी 'आदि' अब जान से प्यारा तो कोई दोस्त होना चाहिए
Aditya Maurya
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तुझ से हम फ़ासले बुनकर के ही कुछ सोचेंगे अब ही सोचा तो अज़ीयत से ही मर जाएँगे
Aditya Maurya
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जो पहलू में है तन्हाई है मेरे दोस्त यही अपनी शनासाई है मेरे दोस्त
Aditya Maurya
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ज़िन्दगी से साथ उस का अब पुराना चाहिए बस मुझे तो याद करने का बहाना चाहिए
Aditya Maurya
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