रोज़ रोने के बहाने ढूँढ़ते है बेबसी से अपने रिश्ते ख़ून के है देख लेंगे फिर ग़लत क्या है सही क्या आ अभी इक दूसरे को चूमते है
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मैं जब सो जाऊँ इन आँखों पे अपने होंट रख देना यक़ीं आ जाएगा पलकों तले भी दिल धड़कता है
Bashir Badr
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वो आए घर में हमारे ख़ुदा की क़ुदरत है कभी हम उन को कभी अपने घर को देखते हैं
Mirza Ghalib
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अपने भी तुझ को अपनों में अब गिन नहीं रहे 'अफ़कार' मान जा कि तेरे दिन नहीं रहे
Afkar Alvi
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किसी को अपने अमल का हिसाब क्या देते सवाल सारे ग़लत थे जवाब क्या देते
Muneer Niyazi
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ये नहीं है कि वो एहसान बहुत करता है अपने एहसान का एलान बहुत करता है आप इस बात को सच ही न समझ लीजिएगा वो मेरी जान मेरी जान बहुत करता है
Jawwad Sheikh
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हूँ यूँँ टूटा नहीं था जानता मैं मुझे मेरी हँसी से ख़ुश लगा मैं उसे मिलना तो था बेबाक होकर वो आई सामने तो बिछ गया मैं
Aman Mishra 'Anant'
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उलझा कर जिस को ये दुनिया रखती है सादा सी प्यारी सी अच्छी लड़की है
Aman Mishra 'Anant'
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ये जो ढलती हुई जवानी है हर नए साल की कहानी है देख आँखें मेरी बता मुझ को इस में किस नाम की निशानी है
Aman Mishra 'Anant'
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अपने हाथों को बना पतवार जाते राम का ले नाम दरिया पार जाते हम ने झूठी जीत से ढाढस बढ़ाया मान लेते हार तो फिर हार जाते
Aman Mishra 'Anant'
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ये दुनिया ही मुझे क्या क्या बुलाती है कि माँ तो आज भी लल्ला बुलाती है
Aman Mishra 'Anant'
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