शाम होते ही चली आती हैं यादें जैसे मय्यत पे चले आते हैं सब लोग
Related Sher
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
484 likes
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
300 likes
मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
388 likes
दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है लंबी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
Faiz Ahmad Faiz
267 likes
More from ABhishek Parashar
ज़हरस इतने तो नहीं मरते लोग मरते हैं जितने तानों से
ABhishek Parashar
0 likes
ये जगह उतनी भी नहीं बदली जितनी जानाँ बदल गई हो तुम
ABhishek Parashar
0 likes
तुम्हारे हिज्र में मरने से बेहतर है मेरी जान मैं अपना दिल किसी टूटे हुए दिल से लगा लूँ
ABhishek Parashar
0 likes
रात को नींद चैन से आती गर झगड़ते नहीं ख़यालों से
ABhishek Parashar
0 likes
वो मुझे तंग कर नहीं सकते उन को ये बात तंग करती है
ABhishek Parashar
0 likes
Similar Writers
Our suggestions based on ABhishek Parashar.
Similar Moods
More moods that pair well with ABhishek Parashar's sher.







