शाहज़ादे पता नहीं तुम को तुम पे कितनी कनीज़ मरती हैं
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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दाग़ दामन पर तुम्हारे जब लगे ये न तुम भी देख पाए कब लगे ठीक उस ने तब निशाना तय किया तीर सीने में तुम्हारे जब लगे
Arohi Tripathi
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राम लिखने लगी मैं काग़ज़ पर काम आसान हो गए मेरे
Arohi Tripathi
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शाहज़ादी ख़बर नहीं तुझ को तुझ पे कितने ग़ुलाम मरते हैं
Arohi Tripathi
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यार उस ने अब निशाना तय किया जाँ मगर पहले दिवाना तय किया वो सफ़र से लौट कर जो आ गया यार पहले ही ठिकाना तय किया
Arohi Tripathi
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तुम्हारा ज़िक्र हो जिस में इबादत वैसी करनी है मोहब्बत हो तबीअत हो इनायत हो जियारत हो
Arohi Tripathi
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