राम लिखने लगी मैं काग़ज़ पर काम आसान हो गए मेरे
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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हर चीज़ पे छाई है उदासी ही उदासी अब घर मेरे आई है उदासी ही उदासी
Arohi Tripathi
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तुम्हारा दिल नहीं तोडूँगी जानी मगर तुम को नहीं छोडूँगी जानी मोहब्बत में हुआ है जो हुआ है कलाई अब नहीं मोडूँगी जानी
Arohi Tripathi
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इश्क़ का जब बुख़ार उतरेगा तब मिरा यार ऐसे चीख़ेगा
Arohi Tripathi
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मौत को जब क़रीब से देखे सारे मंज़र अजीब से देखे
Arohi Tripathi
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महीनों बा'द जब वापस से अपने घर गई थी मैं अधूरी बात को कहते हुए ही मर गई थी मैं
Arohi Tripathi
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