सुब्ह सवेरे नंगे पाँव घास पे चलना ऐसा है जैसे बाप का पहला बोसा क़ुर्बत जैसे माँओं की
sherKuch Alfaaz
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आज का दिन भी ऐश से गुज़रा सर से पाँव तक बदन सलामत है
Jaun Elia
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तेरा चेहरा सुब्ह का तारा लगता है सुब्ह का तारा कितना प्यारा लगता है तुम से मिल कर इमली मीठी लगती है तुम से बिछड़ कर शहद भी खारा लगता है
Kaif Bhopali
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डरा-धमका के तुम हम सेे वफ़ा करने को कहते हो कहीं तलवार से भी पाँव का काँटा निकलता है
Munawwar Rana
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बाक़ी सारे काम भुलाकर इश्क़ किया सुब्ह से ले कर शाम बराबर इश्क़ किया ग़लती ये थोड़े थी इश्क़ किया हम ने ग़लती ये थी ग़ैर बिरादर इश्क़ किया
Vashu Pandey
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घास की तरह पड़े हैं हम लोग न बुलंदी है न गहराई है
Farhat Ehsaas
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