ताजमहल का गारा चूने से नहीं लहू से बनता था नींव में हम डलते हैं जिस सेे आप बड़े हो जाते हैं
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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जब से हम ज़िंदगी को समझने लगे तब से हम ख़ुद-कुशी को समझने लगे बेवफ़ाई सनम आपने जब से की तब से हम बंदगी को समझने लगे
Aatish Indori
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फंदा-वंदा छोड़ कर मैं दूजा सपना बुन रहा हूँ ख़ुद-कुशी तुझ को नहीं मैं ज़िंदगी को चुन रहा हूँ जान-ए-जानाँ जा रहा हूँ मैं मोहब्बत के शिखर पर आशिक़ी को छोड़ कर मैं बंदगी को चुन रहा हूँ
Aatish Indori
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तिजोरी तो भरी लेकिन ठगाई भी की उस ने वफ़ा की ढेर लेकिन बेवफ़ाई भी की उस ने
Aatish Indori
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सनद रहे सब को जल्लादों ने तक़रीरें कर दी हैं काफ़िर का जो सर काटेगा वो मोमिन कहलाएगा
Aatish Indori
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रूम पर आप हैं और सब्र हमारा देखो बंद खिड़की नहीं की और न ही पर्दा खींचा
Aatish Indori
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