taras rahi thin ye aankhen kisi ki surat ko so hum bhi dasht mein aab-e-rawan utha lae
sherKuch Alfaaz
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मुझ ऐसा शख़्स अगर क़हक़हों से भर जाए ये साँस लेती उदासी तो घुट के मर जाए वो मेरे बा'द तरस जाएगा मोहब्बत को उसे ये कहना अगर हो सके तो मर जाए
Rakib Mukhtar
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है दुख तो कह दो किसी पेड़ से परिंदे से अब आदमी का भरोसा नहीं है प्यारे कोई
Madan Mohan Danish
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किसी के ज़ख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बाँधेगा अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बाँधेगा
Munawwar Rana
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लोग सुन कर वाह-वाही करते हैं हर बार ही रोज़ ही रोता हूँ अब तो मैं किसी सुर-ताल में
nakul kumar
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कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़ किसी की आँख में हम को भी इंतिज़ार दिखे
Gulzar
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