तश्नगी अपनी बढ़ाओ मेरे दिलबर जानी एक दर्या हूँ मैं प्याले में नहीं आऊँगा
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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बात ही कब किसी की मानी है अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी ये कलाई ये जिस्म और ये कमर तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी
Jaun Elia
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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मिले किसी से गिरे जिस भी जाल पर मेरे दोस्त मैं उस को छोड़ चुका उस के हाल पर मेरे दोस्त ज़मीं पे सबका मुक़द्दर तो मेरे जैसा नहीं किसी के साथ तो होगा वो कॉल पर मेरे दोस्त
Ali Zaryoun
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उस की ता'रीफ़ मत किया कीजिए उस को पिंपल निकलने लगता है
Ramnath Shodharthi
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तुम्हें जन्नत में होना चाहिए था जहन्नुम में भला क्या कर रहे हो
Ramnath Shodharthi
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यही तो ज़िंदगी की ख़ूबसूरती है मियाँ किसी को इल्म नहीं कल यहाँ पे क्या होगा
Ramnath Shodharthi
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ये जो रौनक़ है मेरे चेहरे पर ये मेरे ग़म का कार-नामा है
Ramnath Shodharthi
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फूलों की हिफ़ाज़त में लगा दीजिए मुझ को कांटा हूँ मेरा हक़ है मेरा काम यही है
Ramnath Shodharthi
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