tumhaari failon mein ganw ka mausam gulabi hai magar ye aankde jhuthe hain ye da'wa kitabi hai
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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क्यूँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा
Javed Akhtar
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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जो बदल सकती है इस दुनिया के मौसम का मिज़ाज उस युवा पीढ़ी के चेहरे की हताशा देखिए
Adam Gondvi
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बेचता यूँँ ही नहीं है आदमी ईमान को भूख ले जाती है ऐसे मोड़ पर इंसान को शबनमी होंठों की गर्मी दे न पाएगी सुकून पेट के भूगोल में उलझे हुए इंसान को
Adam Gondvi
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तुम्हारी फाइलों में गाँव का मौसम गुलाबी है मगर ये आंकड़े झूठे हैं ये दावा किताबी है
Adam Gondvi
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घर में ठंडे चूल्हे पर अगर ख़ाली पतीली है बताओ कैसे लिख दूँ धूप फागुन की नशीली है
Adam Gondvi
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मरने वाले तो ख़ैर बेबस हैं जीने वाले कमाल करते हैं
Adam Gondvi
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