उस का कोई ख़याल जो बेहतर हो बेहतरीन मैं ने खुली किताब को दिल से लगा लिया
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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मर चुका है दिल मगर ज़िंदा हूँ मैं ज़हर जैसी कुछ दवाएँ चाहिए पूछते हैं आप आप अच्छे तो हैं जी मैं अच्छा हूँ दुआएँ चाहिए
Jaun Elia
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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उस की याद न आएगी तो क्या हो जाएगा मेरा मन कोना-कोना सूना हो जाएगा
Umesh Maurya
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वो ख़त भी साथ बूढ़ा हो गया था लिखा पर दे न पाया था उसी को
Umesh Maurya
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नींद गहरी सुला के आ जाऊँ लाश अपनी जला के आ जाऊँ
Umesh Maurya
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पहाड़ों को अगर तोड़ोगे तो पत्थर बनेंगे ही कभी ठोकर बनेंगे या घरों के काँच तोड़ेंगे
Umesh Maurya
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मेरे दिल से निकल नहीं जाता दर्द उस का पिघल नहीं जाता
Umesh Maurya
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