पहाड़ों को अगर तोड़ोगे तो पत्थर बनेंगे ही कभी ठोकर बनेंगे या घरों के काँच तोड़ेंगे
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दुख अपना अगर हम को बताना नहीं आता तुम को भी तो अंदाज़ा लगाना नहीं आता
Waseem Barelvi
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कभी जो ख़्वाब था वो पा लिया है मगर जो खो गई वो चीज़ क्या थी
Javed Akhtar
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तेरी आँखों में जो इक क़तरा छुपा है, मैं हूँ जिस ने छुप छुप के तेरा दर्द सहा है, मैं हूँ एक पत्थर कि जिसे आँच न आई, तू है एक आईना कि जो टूट चुका है, मैं हूँ
Fauziya Rabab
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अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें
Ahmad Faraz
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कोई काँटा कोई पत्थर नहीं है तो फिर तू सीधे रस्ते पर नहीं है मैं इस दुनिया के अंदर रह रहा हूँ मगर दुनिया मेरे अंदर नहीं है
Zubair Ali Tabish
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जिस्म तो बेचे ख़रीदे जा रहे हैं आवरण रिश्तों रिवाज़ों के चढ़ाकर
Umesh Maurya
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उस की याद न आएगी तो क्या हो जाएगा मेरा मन कोना-कोना सूना हो जाएगा
Umesh Maurya
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वो ख़त भी साथ बूढ़ा हो गया था लिखा पर दे न पाया था उसी को
Umesh Maurya
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था इश्क़ बे-शुमार मगर कह नहीं सके थी ख़ूबसूरती यही सच्चे ग़ुनाह की
Umesh Maurya
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नसीहत अब हमें अच्छे की मत दो भले बनकर बहुत कुछ खो चुके हैं
Umesh Maurya
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