उस को राँझा मत कहो, जो ना हुआ फ़क़ीर जो ना जोगन हो सकी, सो काहे की हीर!
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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा
Tehzeeb Hafi
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गले तो लगना है उस से कहो अभी लग जाए यही न हो मेरा उस के बग़ैर जी लग जाए मैं आ रहा हूँ तेरे पास ये न हो कि कहीं तेरा मज़ाक़ हो और मेरी ज़िंदगी लग जाए
Tehzeeb Hafi
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इसी जगह इसी दिन तो हुआ था ये एलान अँधेरे हार गए ज़िंदाबाद हिन्दोस्तान
Javed Akhtar
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तुम उन के वा'दे का ज़िक्र उन से क्यूँँ करो 'ग़ालिब' ये क्या कि तुम कहो और वो कहें कि याद नहीं
Mirza Ghalib
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आदमी देश छोड़े तो छोड़े 'अली' दिल में बसता हुआ घर नहीं छोड़ता एक मैं हूँ कि नींदें नहीं आ रही एक तू है कि बिस्तर नहीं छोड़ता
Ali Zaryoun
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गिफ़्ट कर देता हूँ उस को मैं किताबें, लेकिन उन को पढ़ लेने की मोहलत नहीं देता उस को
Harman Dinesh
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हम ने ग़ज़लों में हुक़ूमत को लिखी है 'लानत धमकियाँ आती हैं, इन'आम तो आने से रहा
Harman Dinesh
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भूल जाना तुझे नहीं मुश्किल जानता हूँ, मगर नहीं होता
Harman Dinesh
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मैं खोया खोया सा तेरी छत की जानिब देख रहा हूँ गीले कपड़े सूख रहे हैं, सूखी आँखें भीग रही हैं
Harman Dinesh
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देख! इस बार भी तुझ सेे न मनाया गया मैं अबकी बारी भी मेरे दिल ने मनाया है मुझे
Harman Dinesh
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