हम ने ग़ज़लों में हुक़ूमत को लिखी है 'लानत धमकियाँ आती हैं, इन'आम तो आने से रहा
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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उस को राँझा मत कहो, जो ना हुआ फ़क़ीर जो ना जोगन हो सकी, सो काहे की हीर!
Harman Dinesh
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मेरा हर दिन तेरी फ़ुर्क़त में बसर होता है यार होना तो नहीं चाहिए, पर होता है
Harman Dinesh
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भूल जाना तुझे नहीं मुश्किल जानता हूँ, मगर नहीं होता
Harman Dinesh
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गिफ़्ट कर देता हूँ उस को मैं किताबें, लेकिन उन को पढ़ लेने की मोहलत नहीं देता उस को
Harman Dinesh
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यूँँ तो सर्कस में हम बहुत ख़ुश हैं फिर भी जंगल तो यार जंगल था
Harman Dinesh
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