अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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दिया जला के सभी बाम-ओ-दर में रखते हैं और एक हम हैं इसे रह-गुज़र में रखते हैं समुंदरों को भी मालूम है हमारा मिज़ाज कि हम तो पहला क़दम ही भँवर में रखते हैं
Abrar Kashif
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हर एक लफ़्ज़ के तेवर ही और होते हैं तेरे नगर के सुख़न-वर ही और होते हैं तुम्हारी आँखों में वो बात ही नहीं ऐ दोस्त डुबोने वाले समुंदर ही और होते हैं
Abrar Kashif
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घर की तक़्सीम में अँगनाई गँवा बैठे हैं फूल गुलशन से शनासाई गँवा बैठे हैं बात आँखों से समझ लेने का दावा मत कर हम इसी शौक़ में बीनाई गँवा बैठे हैं
Abrar Kashif
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करती है तो करने दे हवाओं को शरारत मौसम का तकाज़ा है कि बालों को खुला छोड़
Abrar Kashif
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अब के हम तर्क-ए-रसूमात कर के देखते हैं बीच वालों के बिना बात कर के देखते हैं इस सेे पहले कि कोई फ़ैसला तलवार करे आख़िरी बार मुलाक़ात कर के देखते हैं
Abrar Kashif
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