उठो ये मंज़र-ए-शब-ताब देखने के लिए कि नींद शर्त नहीं ख़्वाब देखने के लिए
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इसीलिए तो मैं रोया नहीं बिछड़ते समय तुझे रवाना किया है जुदा नहीं किया है
Ali Zaryoun
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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मुद्दतों बा'द इक शख़्स से मिलने के लिए आइना देखा गया, बाल सँवारे गए
Jaun Elia
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इसीलिए तो सब सेे ज़्यादा भाती हो कितने सच्चे दिल से झूठी क़स में खाती हो
Tehzeeb Hafi
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इस लिए ये महीना ही शामिल नहीं उम्र की जंत्री में हमारी उस ने इक दिन कहा था कि शादी है इस फरवरी में हमारी
Tehzeeb Hafi
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एक मैं हूँ कि इस आशोब-ए-नवा में चुप हूँ वर्ना दुनिया मेरे ज़ख़्मों की ज़बाँ बोलती है
Irfan Siddiqi
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मैं ख़्वाब देख रहा हूँ कि वो पुकारता है और अपने जिस्म से बाहर निकल रहा हूँ मैं
Irfan Siddiqi
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कहा था तुम ने कि लाता है कौन इश्क़ की ताब सो हम जवाब तुम्हारे सवाल ही के तो हैं
Irfan Siddiqi
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देखते हैं तो लहू जैसे रगें तोड़ता है हम तो मर जाएँगे सीने से लगा कर उस को
Irfan Siddiqi
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तू ये न देख कि सब टहनियाँ सलामत हैं कि ये दरख़्त था और पत्तियाँ भी रखता था
Irfan Siddiqi
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