वही शागिर्द फिर हो जाते हैं उस्ताद ऐ 'जौहर' जो अपने जान-ओ-दिल से ख़िदमत-ए-उस्ताद करते हैं
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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ग़ैरों से तो फ़ुर्सत तुम्हें दिन रात नहीं है हाँ मेरे लिए वक़्त-ए-मुलाक़ात नहीं है
Lala Madhav Ram Jauhar
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नाला-ए-बुलबुल-ए-शैदा तो सुना हँस हँस कर अब जिगर थाम के बैठो मिरी बारी आई
Lala Madhav Ram Jauhar
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मेरी ही जान के दुश्मन हैं नसीहत वाले मुझ को समझाते हैं उन को नहीं समझाते हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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भाँप ही लेंगे इशारा सर-ए-महफ़िल जो किया ताड़ने वाले क़यामत की नज़र रखते हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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दोस्त दिल रखने को करते हैं बहाने क्या क्या रोज़ झूटी ख़बर-ए-वस्ल सुना जाते हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
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