ग़ैरों से तो फ़ुर्सत तुम्हें दिन रात नहीं है हाँ मेरे लिए वक़्त-ए-मुलाक़ात नहीं है
Related Sher
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
435 likes
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
545 likes
ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
508 likes
ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
173 likes
More from Lala Madhav Ram Jauhar
मेरी ही जान के दुश्मन हैं नसीहत वाले मुझ को समझाते हैं उन को नहीं समझाते हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
22 likes
भाँप ही लेंगे इशारा सर-ए-महफ़िल जो किया ताड़ने वाले क़यामत की नज़र रखते हैं
Lala Madhav Ram Jauhar
20 likes
नाला-ए-बुलबुल-ए-शैदा तो सुना हँस हँस कर अब जिगर थाम के बैठो मिरी बारी आई
Lala Madhav Ram Jauhar
20 likes
मुँह पर नक़ाब-ए-ज़र्द हर इक ज़ुल्फ़ पर गुलाल होली की शाम ही तो सहर है बसंत की
Lala Madhav Ram Jauhar
23 likes
जो दोस्त हैं वो माँगते हैं सुलह की दुआ दुश्मन ये चाहते हैं कि आपस में जंग हो
Lala Madhav Ram Jauhar
37 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Lala Madhav Ram Jauhar.
Similar Moods
More moods that pair well with Lala Madhav Ram Jauhar's sher.







