वक़्त गुजरा हुआ यादों में चला आता है वक़्त के साथ जो गुजरा वो कहाँ आता है रूठने और मनाने के रिवाजों से परे सिर्फ़ तन्हाई में जीने का मज़ा आता है
Related Sher
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
435 likes
सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
545 likes
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
401 likes
मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
140 likes
More from Aditya
ज़रा सी पी जो ली हम ने बपा है क्यूँ ये हंगामा दिवाने मीर-ओ-ग़ालिब के करें ना ये करें तो क्या
Aditya
0 likes
तुम्हारे चाहने वाले हज़ारों लोग हैं लेकिन हमारे जैसा उन में कोई लासानी हो तो जानू
Aditya
0 likes
ऐ ख़ुदा अब इक हुनर ऐसा अता कर दो मुझे इश्क़ भी चलता रहे और दर्द भी ना हो मुझे
Aditya
0 likes
ये जो कुछ घर तुम्हारे और मेरे बीच में हैं ना कि लज्जत इश्क़ में अपने इसी चलते नहीं आती
Aditya
0 likes
तेरे ख़्वाबों ने मुझे चैन से सोने न दिया दूर नींदों से कहीं रात गुज़ारी मैं ने लौट कर आए जो घर शाम थके हारे तब झूठ की इक हँसी चेहरे से उतारी मैं ने
Aditya
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Aditya.
Similar Moods
More moods that pair well with Aditya's sher.







