वक़्त गुज़रा हुआ यादों में चला आता है वक़्त के साथ जो गुज़रा वो कहाँ आता है रूठने और मनाने के रिवाजों से परे सिर्फ़ तन्हाई में जीने का मज़ा आता है
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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ये जो कुछ घर तुम्हारे और मेरे बीच में हैं ना कि लज्जत इश्क़ में अपने इसी चलते नहीं आती
Aditya
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झूठ कहना मुझे नहीं आता पर चलो इज़्तिहाद करता हूँ अब तेरी याद ख़ुद नहीं आती तौर-ए-रस्मन मैं याद करता हूँ
Aditya
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ज़रा सी पी जो ली हम ने बपा है क्यूँ ये हंगामा दिवाने मीर-ओ-ग़ालिब के करें ना ये करें तो क्या
Aditya
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तुम्हारे चाहने वाले हज़ारों लोग हैं लेकिन हमारे जैसा उन में कोई लासानी हो तो जानू
Aditya
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मेरी सूरत न मेरा हाल न आदत देखो देखना है जो तुम्हें कुछ मेरी उल्फत देखो
Aditya
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