ये फ़क़त माँग में भरने से शाज़ सिन्दूर हो जाता है
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा
Ahmad Faraz
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ज़ियादा शक की गुंजाइश नहीं होगी यक़ीं मानो तुम्हारे हिस्से का तुम को समय और फ़ासला दूँगा
Milan Gautam
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उस ने माँगी ज़मीन-ए-मोहब्बत मिरी मैं भी उद्दीप्त उर का गगन दे चुका
Milan Gautam
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प्यार वो जज़्बा है जिस में केवल ग़म का बोझा ढोना होता है
Milan Gautam
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ये ज़ुल्मतें कि चराग़ों पे हावी हो रही हैं वो हुस्न सामने आए सियाही छट जाए
Milan Gautam
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नशा करने में कोई भी कसर छोड़ी नहीं है मुझे अब तक तो उस को भूल जाना चाहिए था
Milan Gautam
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