ज़रा सी कामयाबी पर ग़ुरूर उन को है इतना क्यूँ ये दुनिया ख़्वाब है फिर ख़्वाब की औक़ात ही क्या है
Related Sher
तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
401 likes
ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
508 likes
तू किसी और ही दुनिया में मिली थी मुझ सेे तू किसी और ही मौसम की महक लाई थी डर रहा था कि कहीं ज़ख़्म न भर जाएँ मेरे और तू मुट्ठियाँ भर-भर के नमक लाई थी
Tehzeeb Hafi
331 likes
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
471 likes
उस लड़की से बस अब इतना रिश्ता है मिल जाए तो बात वगैरा करती है बारिश मेरे रब की ऐसी नेमत है रोने में आसानी पैदा करती है
Tehzeeb Hafi
285 likes
More from Nityanand Vajpayee
वो जो पत्थर हमारे सर पे मारा फेंककर तुम ने उसी पत्थर को हम ने घर का कंगूरा बनाया है अधूरा प्यार था कोई कि इकतरफ़ा मुहब्बत थी हमारी शा'इरी ने लो उसे पूरा बनाया है
Nityanand Vajpayee
1 likes
वो तेरा क्या बिगाड़ पाएगा राह में जो पहाड़ आएगा रख इरादों में अपने मज़बूती तुझ से फ़ौलाद थरथराएगा
Nityanand Vajpayee
1 likes
फ़ज़ा में इक नई रंगत है बे-ईमान है मौसम भले कुछ देर ही रुकते मगर दिलबर चले आते
Nityanand Vajpayee
0 likes
रहे हो आप काँटों में महीनों तक मेरे दिलबर बस इक शब होने को सोचा था हम-बिस्तर चले आते
Nityanand Vajpayee
0 likes
वाह रंगीं पलाश जैसे हैं आप के लब ये ख़ाश जैसे हैं जो इन्हें चूमना नहीं चाहें हैं न ज़िंदा वो लाश जैसे हैं
Nityanand Vajpayee
1 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Nityanand Vajpayee.
Similar Moods
More moods that pair well with Nityanand Vajpayee's sher.







